


"खत"
आज लहू का कतरा कतरा स्याई बना है,
और ये जख्मी दिल ही खत की लिखाई बना है.
दर्द बडा बेदर्द है, वो ही गवाही बना है,
तार- तार हर दिल कौना तबाही बना है.
देख मेरे चाहत का किस्सा जग हंसाई बना है,
मेरे बर्बादी का सारा ही जहाँ तमाशाई बना है.
नाम वफा था जिसका वो ही बेवफाई बना है,
जख्मों से रिसता लहू मेरी सच्चाई बना है.
कोई साथ नही हर मंजर तन्हाई बना है ,
आंसू का हर मोती मेरा हमराही बना है.
खुने दिल से लिखा ये "खत",मेरे रुसवाई बना है,
घडी कयामत की है जिसमे जनाजा हे मेरी शहनाई बना है!



9 comments:
Hi,
Read your poem, it is really full of pain n emotions. wonderful poetry. i have never read before.
"The day i will know about myself, i wll be free from every thing"
एक प्रसिद्ध शायर का यह शेर आपके मुक्ति के पल को समाज के प्रति शव्दों के दायित्व से और भी जकडता है (शेर के कुछ शव्दों में गलतियां हो सकती है इसके भाव को ध्यान दें)
कैदो हयात बंदे गम असल में दोनो एक हैं
मौत से पहले कोई इससे निजात पाये क्यों ।
आरंभ
very good
keh diya "Intezaar karna kal tak ke liye"
ttaal denge hum bhi marna kal tak ke liye
sammet lega khat unka aate hi apne aap me
padega humen sirf bikharna kal tak ke liye
surender kumar abhin
कोई साथ नही हर मंजर तन्हाई बना है ,
आंसू का हर मोती मेरा हमराही बना है.
खुने दिल से लिखा ये "खत",मेरे रुसवाई बना है,
घडी कयामत की है जिसमे जनाजा हे मेरी शहनाई बना है!
bahut pyara...dil mein utar gaya seema ji...
वाह! आनन्द आ गया.
कोई साथ नही हर मंजर तन्हाई बना है ,
आंसू का हर मोती मेरा हमराही बना है.
हकीकत के करीब शेर है, बहुत बहुत बधाई।
होली की हार्दिक शुभकामनाये आपका ब्लाग भी बहुत सुन्दर है
MIT GAYE MAREE UMEEDOON KEE TARA HARF MAGAR, AAJ TAK TAREY KHATOON SAY TAREE KUSHBOO NA GAYEE
An Indian in KSA
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