Friday, April 18, 2008

"लिखें हम "





"लिखें हम "


तेरा अफ़साना लिखें हम , तेरा तराना लिखें हम ,
तेरा आना जाना देख , तेरा इतराना लिखें हम .

तेरी पलकों का झुक जाना , कुछ सोच के घबरा जाना ,
तेरा खिल्खीलाना देखें तो, तेरा शर्माना लिखें हम .

तेरी आँखों की मदहोशी , तेरे लबों के खामोशी ,
तेरी बातें जो सुन लें तो , तेरा चह्चाना लिखें हम .

तेरे चेहरे की ये मस्ती , जैसे फूलों की ताजगी ,
तेरी इस बेखुदी मे फ़िर तेरा लहराना लिखें हम .

कभी यूं रूठ के जाना , कभी आँखों मे ही मुस्काना ,
तेरी इस अदा से फ़िर , दिल का बहलाना लिखें हम .

सांसों को महकती तेरी सुबह , दिल को धड़कती तेरी शामें ,
तेरे प्यार मे डूबे दिन रात का एक फसाना लिखें हम .

आज ये दिल चाहे फ़िर तेरा नजराना लिखें हम ,
जो कभी खत्म ना हो तेरा वो खजाना लिखें हम ….

5 comments:

Imran Jalandhari said...

लाजवाब, आपको पढ़ने के लिए समय निकालना ही पड़ेगा। अच्छे ब्लाग बनाए हैं आपने....

Imran Jalandhari said...

लाजवाब, आपको पढ़ने के लिए समय निकालना ही पड़ेगा। अच्छे ब्लाग बनाए हैं आपने....

mukesh said...

bahut hi accha likhti haio aap, agar aapko bura na lage too aap mujhe orkut par in sabko bheje ya mujhe mail bhi kar shakti hai . gargbrother2006@gmail.com

wajha sirf time kam nikal pana par jab bhi time milta hai to net par aa kar istrha ki rachnaoo ko padna accha lagta hai

Udan Tashtari said...

बहुत बढ़िया. स्वागत है.

seema gupta said...

Smeer lal jee

Thanks a lot for visiting my blog and appreciating it.

With Regards