




" आज फिर"
आज फिर ये दो अखीयाँ भर आयी है,
आज फिर ये दो अखीयाँ भर आयी है,
आज फिर तेरी याद चली आए है .
दिल ने कहा ताजा कर लें वो सारे गम,
दिल ने कहा ताजा कर लें वो सारे गम,
आज फिर हमने जख्मों की किताब उठाई है.
लबों ने चाहा कर लें खामोशी से बातें हम,
लबों ने चाहा कर लें खामोशी से बातें हम,
आज फिर हमने अप्पने तबीयत बेहलाई है.
नज़र मचल गई है एक दीदार को तेरे
नज़र मचल गई है एक दीदार को तेरे
आज फिर तेरी तस्वीर नज़र आयी है.
रहा नही वायदों और वफाओं का वजूद कोई,
रहा नही वायदों और वफाओं का वजूद कोई,
आज फिर हर एक चोट उभर आयी है.
आज फिर ये दो अखीयाँ भर आयी है,
आज फिर ये दो अखीयाँ भर आयी है,
आज फिर तेरी याद चली आए है .
आज फिर हमने चाहा करें टूट कर प्यार तुम्हे ,
आज फिर हमने चाहा करें टूट कर प्यार तुम्हे ,
आज फिर दिल मे वही आग सुलग आयी है.
आज फिर ये दो अखीयाँ भर आयी है,
आज फिर तेरी याद चली आए है .
20 comments:
ek bar fir se quambrebahut khob likha hai. apki suru ki hi 2 kavitaye itni acchi lagi ki agar aapko taklif na ho to aapse request karna chunga ki aap apni sari kavitaye meri orkut id par ranju ji ki trha hi bheje to main waha hi pad kar apne coments de diya karunga. kyuki aaj kal main online kam hi ho pata hu par jab bhi hota hu jiske msg aate hai unki bato ka jawab jaror deta hu
दिल ने कहा ताजा कर लें वो सारे गम,
आज फिर हमने जख्मों की किताब उठाई है.
Kya khoob likha hai ! pehli baar aapke blog par achanak nazar gayee aur ruk gayee. achchha laga aapki rachnaon ko padhkar.aise hi likhtee rahein. shubhkamnaein sweekar karein ...
तुमको रोता देखकर होता हमको फील
सुंदरतम संसार की छलक रहीं दो झील
आज फिर तेरी तस्वीर नज़र आयी है.
रहा नही वायदों और वफाओं का वजूद कोई,
आज फिर हर एक चोट उभर आयी है.
आज फिर ये दो अखीयाँ भर आयी है,
आज फिर तेरी याद चली आए है .
प्रेम में दूसरे पक्ष द्वारा महसूस न की जाने वाली सहनशीलता पर नायब प्रस्तुति.
आभार.
चन्द्र मोहन गुप्त
kafi dino baad is post par koi rachna lagaai gai
badhaai nayaab lekhni ki
आज फिर आपकी एक अच्छी कविता पढने को मिली,
आज फिर आपको दे रहा हूं बधाई।
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary- TSALIIM / SBAI }
आज फिर किसी की याद आई है ,आज फिर पूरी रात रुलाई है....
अखबारी कतरनों से चिट्ठे की लय टूटती है. रचना को टंकित कर पत्रिका का नाम, अंक, संपर्क जोड़ दें तो बेहतर होगा.
न सुर है नताल है---कोई बात नहीं--
तू गाता चल ए यार ! कोई कायदा न देख,
कुछ अपना ही अन्दाज़ हो खुद्दारी गज़ल होती है।
सीमा जी,
मैने आपकी कई कविताये पढी, सबमे एक अजीब सी टीस, एक दर्द, एक निराशा.
क्या निराशावादी विचारधारा ठीक है?
क्या किसी के वियोग के बाद जीवन खत्म हो जाता है? आप यह क्यो नही सोचती कि यदि वह मिल जाता तो आप पारिवारिक कलह के के उस दलदल मे फसकर उनसे उबासी आ जाती.
वास्तव मे यह मेरी सोन्च है कि विरह प्रेम का सौन्दर्य है,वास्तविक प्रेम विरह की अग्नि मे तपकर सोने की तरह निखरता है.
इससे उबरिये, दुनिया बहुत बडी है,सब कुछ ईश्वर हमारे भले के लिये ही करता है.
शुभकामनाओ के साथ
you are a great contemporary poetess of pains and sufferrings.i like ur boldness.
आज फिर तेरी याद चली आए है .
आज फिर हमने चाहा करें टूट कर प्यार तुम्हे ,
आज फिर दिल मे वही आग सुलग आयी है.
आज फिर ये दो अखीयाँ भर आयी है,
आज फिर तेरी याद चली आए है .
waaqai mein aisa hi hota hai.... yaaden kabhi bhi peecha nahin chodti hain...... koi duster hai hi nahi ......yaadon ko mitane ke liye.....
वाह पढ़के आपकी पंक्तियों को.....
हमारी भी अँखियाँ भार आई.....
दिल ने फ़िर याद किया..... इस पुराने गाने की पुनराव्रत्ति है।
आज फिर तेरी याद चली आए है .
आज फिर हमने चाहा करें टूट कर प्यार तुम्हे ,
आज फिर दिल मे वही आग सुलग आयी है.
आज फिर ये दो अखीयाँ भर आयी है,
आज फिर तेरी याद चली आए है
aapki kavita khoobsurat ahsaason se sarabor ...dil ko chhoo gayi hai..
Bahut khoob likha hai.
kaafi din bad aapke blog pe aaya.
padhkar kuchh lines mann me aa rahi hai jo likh raha hu...
yaad kab nahi aati teri, jo baat aaj ki karein...
baat dil ki karein yaa khwabo ki karein,,,,,
aankhein to khwab me bhi bharti hai aur
yaad me bhi bharti hai
didar tera to hota hai aksar khyalo me
batein hoti hai aksar khamoshiyo me
....
....
आज फिर किसी की याद आई है ,आज फिर पूरी रात रुलाई है.
आज फिर हमने चाहा करें टूट कर प्यार तुम्हें।
बहुत सुन्दर लाइन , बहुत सुन्दर मर्म स्पर्शी रचना। बधाई।
आज फिर हमने चाहा करें टूट कर प्यार तुम्हें।
बहुत सुन्दर लाइन , बहुत सुन्दर मर्म स्पर्शी रचना। बधाई।
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