Monday, September 20, 2010

"कब के बिछड़े हुए हम आज कहाँ आ के मिले... "


"रंजना जी, अल्पना जी के साथ एक छोटी सी मुलाकात के कुछ हसीन लम्हे "


अल्पना जी की भारत यात्रा के दौरान अल्पना जी के व्यस्त कार्यक्रम से कुछ पल हमने भी चुरा लिए. एक छोटी सी मुलाकात हुई, रंजना जी और अल्पना जी के साथ और ढेर सारी खरीदारी और खूब बातें. यही बातें और तस्वीरे बस हमारे साथ सारी उम्र चलेंगी.....अंतर्जाल की आभासी दुनिया से बाहर निकल कर ऐसी मुलाकाते न जाने कितने हसीन रिश्ते बुन जाती हैं....."





10 comments:

sidheshwer said...

बहुत बढ़िया ! ऐसे ही खुशनुमा महुल में बनी रहे हिन्दी ब्लग की बनती हुई दुनिया और सब मिलकर अच्छा लिखें, अच्छा पढ़ें ,अच्छा शेयर करें!

P.N. Subramanian said...

आप खुशनसीब हैं. आभासी दुनिया में मेल मुलाकात के बाद जब प्रत्यक्षतः साक्षात्कार होने पर क्या अनुभूति होती होगी इस की हम कल्पना कर सकते हैं

अल्पना वर्मा said...

सही शीर्षक दिया है--ऐसा ही तो था..आप दोनों से मिलकर एक पल को भी नहीं लगा कि पहली बार मिल रही हूँ ...ये ही लगा कि कब की बिछुड़ी हुए सहेलियां मिल रही हैं..अब तो वो मुलाकात स्वप्न सी लग रही है..दो साल से अधिक समय से हम एक दूसरे से रचनाओं के ज़रिए जुड़े हुए थे..मेरा भारत जाने का कार्यक्रम अचानक बना था इसके बावजूद आप दोनों से मिलना हो पाया यह मेरा सौभाग्य है.
-याद है ,उस दिन बहुत बारिश थी ,मैं घर से निकली तो सासु जी ने कहा इतनी बारिश में कैसे जाओगी..
-एक तरफ़ बारिश उस पर सीमा जी आप की तबियत ठीक नहीं थी ..बुखार था..उधर रंजना जी का भी शहर से कहीं बाहर जाने का कार्यक्रम था लेकिन इन सब के बावजूद हम मिले और मिल कर ही रहे ..है न?
कनॉट प्लेस में खरीदारी..खाना-पीना ..वो हंसी मज़ाक ..कितनी सारी बातें ..सुबह से शाम होने को आई तब भी हम लोगों का जाने का दिल ही नहीं था..
वह दिन कभी नहीं भूलेगा...शुक्रिया आप दोनो का..और इस आभासी दुनिया का भी जहाँ से आप जैसी इतनी अच्छी सहेलियां मुझे मिलीं ..
[touch wood!]

प्रकाश गोविन्द said...

आभासी दुनिया से बाहर तीन बहन सरीखी सहेलियों का यूँ मिलना दिल को गुदगुदा गया साथ ही मन को भिगो भी गया
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"कब के बिछड़े हुए हम .....आपने शीर्षक बहुत सटीक दिया है .. अलग होते समय यह गाना भी जरूर गाया होगा - "सलामत रहे दोस्ताना हमारा ..."

आप तीनों को हार्दिक शुभ कामनाएं

मनोज कुमार said...

शीर्षक से ही भावनाओं की गहराई का एह्सास होता है और चित्रों से आत्मीयता। बहुत कुछ बयां कर दिया है आपके इस पोस्ट ने। बहुत अच्छी प्रस्तुति। हार्दिक शुभकामनाएं!

और समय ठहर गया!, ज्ञान चंद्र ‘मर्मज्ञ’, द्वारा “मनोज” पर, पढिए!

Arvind Mishra said...

चश्मे बद्दूर !

Prabha Dash said...

I feel really a great pleasure as fortunately I was also a part of the meeting. All the three ladies were real combinations of Beauty with Brains.
This was memorable moement as three beautiful womens from litreture back ground get together to know each other better. Frankly speaking if anybody wud have met them that day they wud have surprised to know that tey were meeting for the first time, so much of love and affection was visible in their dialogue, I want to wish all of them a vey best of future and hope they meet again and again to encourage each other in their life.
Regards to all of u Seema Madam, Ranjna Madam and Alpana Madam.
With lots of love and best wishes
Prabha

G M Rajesh said...

sathi jab bhi milte hain to khushiyaan laate hi hain aksar

Nazre said...

Main bhi ghajal likhta tha ab se kuch sal pahle,,, aap ke blog ko dekh kar fir se ghajal likhne ka shauk shru ho chuka hai,,, Shukriya inspire karne ke liye,,

Mukesh Garg said...

bahut hi accha laga aap teeno deviyo ko ek sath dekh kar